रात का नायक
पैसे कमाने की दौड़ में शामिल होकर जिन्दगी जीना मैं भी लगभग भूल सा गया हॅू। कभी - कभी आफिस में ज्यादा काम होने पर देर रात घर लौटना पड़ता है। इसी सिलसिलें में एक दिन काफी देर से घर लौटा, अभी मोटर साईकिल को स्टैण्ड पर खड़ा ही किया था कि पीछे से मिश्रा जी ने आवाज दी कि किसी बिजली वाले को बुला लो स्ट्रीट लाइट बार-बार जल बुझ (लुप-लुप कर) रही है। उनके ये शब्द मेरे मस्तिष्क में जा कर कुछ इस प्रकार कौधें जैसे कि किसी ने हथौड़े से जोर दार प्रहार किया हो। अचानक ही कई वर्ष पुरानी घटना कुछ इस तरह से याद आई जैसे कि ये कल की ही बात हो।
ये घटना तब घटित हुई जब मैं 12-13 वर्ष का था। हमारे मोहल्ले के पास में ही एक बस्ती थी जहाॅ दिन भर मजदूरी करने वाले लोग रहतें थें। वहाॅ पर सुविधा के नाम पर सूर्य की रोशनी और शाम की ठण्डी हवा भर थी। वहाॅ की औरतों को पानी भरने के लिये भी हमारे मोहल्ले में चल कर आना पड़ता था। उसी बस्ती में रहते थें सुक्खन चाचा। सुक्खन चाचा का लड़का था रवि, रवि की उम्र यही कोई 8-9 वर्ष की थी वो दिन भर घर से गायब रहता था। दिन भर घर से गायब रहना ही रवि की पहचान बन गयी थी। लेकिन रात के अंधेरे में हमारे मोहल्ले में लगी स्ट्रीट लाइट के नीछे बैठ कर पढनेंकी उसकी आदत ने पूर मोहल्ले को परेशान कर रखा था क्योंकि गर्मी के मौसम में सभी लोग अपनी-अपनी छतों में सोते थें पर स्ट्रीट लाइट के जलने की वजह से लोग ठीक ढंग से सो नही पाते थें इसी बात की वजह से आये दिन मोहल्लेे में झगड़ा होता था। कल रात मोहल्ले में माता का जागरण हुआ, सभी ने माता की भक्ति में सराबोर होकर अमृत रुपी महिमा का आनन्द ग्रहण किया। पूरी रात जागरण की महिमा का अमृत पान करने के बाद सुबह लगभग सभी लोग अपने-अपने काम पर चलेें गये तथा गृहणियाॅ अपने गृह कार्य में लग गयी। रात को सभी लोग थक कर गहरी नींद में सोने जा रहे थंे तभी पड़ोस वाले शर्मा जी ने रवि को डाटा और स्ट्रीट लाइट बंद करने को कहा परन्तु वो अपनी जिद पर अड़कर पढ़ाई करने में लग गया। अचानक रात में रवि के जोर-जोर चिल्लाने से सभी की नीद खराब हो गयी कुछ समय बाद पता चला कि शुक्ला जी के यहाॅ चोरो को घुसते हुए रवि ने देख लिया था। 10 दिन बाद ही शुक्ला जी की लड़की की शादी होने की वजह उनके यहाॅ बहुत कीमती सामन के साथ रुपये-पैसे एवं गहने भी थे। रवि के चिल्लाने से चोर डर कर भाग गये थें। सभी लोग रवि को धन्यवाद दे रहें थे, रवि का शुक्रिया अदा करने के लिये शुुक्ला जी के पास तो शब्द ही नहीं थें। तभी गप्पू भइया ने बड़े प्यार से रवि से पूछा कि बेटा तुम दिन घर से गायब रहते हो और रात में पढते हो ऐसा क्यों ? रवि ने बड़ी मुश्किल से अपने आॅसू छुपाते हुए अपने कटे-फटे हाथ दिखाते हुए कहा कि दिन भर मजदूरी करता हूॅ ताकि मैं भी पढ़ाई कर सकूं। रवि की इस बात को सुनकर सबकी आखों में आसूं आ गयें। उस दिन से सभी ने रवि की पढाई में मद्द करने का वादा किया और उसे ‘‘रात का नायक‘‘ की उपाधि दी। उस घटना को याद करके आज भी सबकी आखे भर जाती हैं। और गर्व से सब कहतें हैं कि रवि आई0आई0टी0 से बी0टेक कर रहा है। ये था हमारा नायक शायद आपके घर या घर के आस-पास भी कोई ना कोई नायक तो जरुर होगा।
" शिवेंद्र त्रिपाठी "
Achchi shuruaat
ReplyDeleteधन्यवाद सर
DeleteBhai dil ko cho gai
ReplyDeleteधन्यवाद सर .. कोशिस भी लोगो के दिल को छूने की है ..
ReplyDeleteआपका बहुत बहुत आभार ..
This is reality....and story is heart touching....nice
ReplyDeletethank u sir ....
DeleteKya baat h Tripathi g
ReplyDeleteTussi jhaa gye Guru....
बहुत बहुत धन्यवाद भरत सर....
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