रात का नायक पैसे कमाने की दौड़ में शामिल होकर जिन्दगी जीना मैं भी लगभग भूल सा गया हॅू। कभी - कभी आफिस में ज्यादा काम होने पर देर रात घर लौटना पड़ता है। इसी सिलसिलें में एक दिन काफी देर से घर लौटा, अभी मोटर साईकिल को स्टैण्ड पर खड़ा ही किया था कि पीछे से मिश्रा जी ने आवाज दी कि किसी बिजली वाले को बुला लो स्ट्रीट लाइट बार-बार जल बुझ (लुप-लुप कर) रही है। उनके ये शब्द मेरे मस्तिष्क में जा कर कुछ इस प्रकार कौधें जैसे कि किसी ने हथौड़े से जोर दार प्रहार किया हो। अचानक ही कई वर्ष पुरानी घटना कुछ इस तरह से याद आई जैसे कि ये कल की ही बात हो। ये घटना तब घटित हुई जब मैं 12-13 वर्ष का था। हमारे मोहल्ले के पास में ही एक बस्ती थी जहाॅ दिन भर मजदूरी करने वाले लोग रहतें थें। वहाॅ पर सुविधा के नाम पर सूर्य की रोशनी और शाम की ठण्डी हवा भर थी। वहाॅ की औरतों को पानी भरने के लिये भी हमारे मोहल्ले में चल कर आना पड़ता था। उसी बस्ती में रहते थें सुक्खन चाचा। सुक्खन चाचा का लड़का था रवि, रवि की उम्र यही कोई 8-9 वर्ष की थी वो दिन भर घर से गायब रहता था। दिन ...